Friday, December 9, 2016

एनोड असेम्बली

एक्सरे ट्यूब में एनोड पॉजिटिव इलेक्ट्रोड होता हैं |एनोड के आधार पर एक्सरे ट्यूब दो प्रकार की होती हैं  स्टेशनरी एनोड एक्सरे ट्यूब  (Stationary anode xray tube) तथा रोटेटिंग एनोड एक्सरे ट्यूब (Rotating anode xray tyub ) एनोड |
(1). स्टेशनरी एनोड -  स्टेशनरी एनोड एक्सरे ट्यूब के एनोड में एक 2-3mm मोटी टंगस्टन प्लेट होती हैं जो कॉपर के मोटे ब्लाक में धसी रहती हैं | सामान्यतया कॉपर की प्लेट वर्गाकार होती हैं तथा इसकी विमाये (लम्बाई तथा चोडाई )लगभग 1cm होती हैं | एनोड एंगल 15-20 डिग्री होता हैं | एनोड मटेरियल टंगस्टन के लेने के निम्न कारण होते हैं-

  1. टंगस्टन का उच्च परमाणु भार (74) होता हैं जो इसे एक्सरे प्रोडक्शन के लिए उपयुक्त बनाता हैं |
  2. इसका गलनांक बिंदु अधिक (3370 ०C ) होता जो इसे एक्सरे प्रोडक्शन के दोरान उत्पन्न अत्यधिक ताप को सहने योग्य बनाता हैं |
  3. यह ऊष्मा का अच्छा अवशोषक होता हैं तथा ऊष्मा को तेजी से टारगेट से दूर फेलाता हैं |
टंगस्टन की तापीय विषेशताए होते हुए भी यह अधिक एक्सपोज़र सहन नहीं कर सकता हैं | इसलिए टंगस्टन के छोटे टुकड़े को बड़े कॉपर ब्लाक में लगाया जाता हैं | कॉपर, टंगस्टन  के मुकाबले ऊष्मा का अच्छा चालक होता हैं इसलिए टंगस्टन ब्लाक को कॉपर में लगाये जाता हैं जिससे एनोड की तापीय विषेशताए बढ़ जाती हैं जिससे यह जल्दी ठंडा होता हैं |
         टंगस्टन टारगेट का वास्तविक आकार फोकल स्पॉट के मुकाबले बहुत बड़ा लिया जाता हैं क्योकि कॉपर का गलनांक बिंदु (1070 ०C ) होता हैं जो टंगस्टन के गलनांक से बहुत कम होता हैं | एक सिंगल एक्सपोज़र से ही फोकल स्पॉट का ताप 1000 ०C या इससे ज्यादा  पहुच जाता हैं  जो तुरंत ही फोकल स्पॉट के आस पास की धातु को गर्म कर देता हैं | अगर टंगस्टन ब्लाक छोटा होगा तो यह अपने आस पास की धातु (कॉपर ) को पिघला देगा इसलिए टंगस्टन ब्लाक का आकर फोकल स्पॉट से बड़ा लिया जाता हैं ताकि यह अपने आस पास उष्मा पहुचने से पहले कुछ ठंडा हो सके | प्रत्येक धातु गर्म होकर पिघलती हैं अलग अलग धातुओं का तापीय  प्रसार गुणांक अलग अलग होता हैं , जिससे सभी धातु अलग अलग दर से पिघलती हैं इस कारण कॉपर व टंगस्टन का जोड़ ढीला होने से टंगस्टन कॉपर ब्लाक से अलग होकर निचे गिर सकता हैं |
(2).


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