Tuesday, November 22, 2016

X-Ray Tube Construction

एक्सरे ट्यूब के निम्न भाग होते हैं -
1.  ट्यूब आवरण  (Tube Envelope)-   एक्स-रे ट्यूब मे एनोड तथा कैथोड एक निर्वातित आवरण में बंद रहते हैं इस एनवलप तथा इसके अन्दर के भाग सम्मिलित रूप से ट्यूब इन्सर्ट (Tube Insert ) कहलाते हैं |अधिकांश एक्सरे ट्यूब में यह एनवलप पायरेक्स ग्लास (Pyrex Glass) का बना  होता हैं लेकिन कुछ आधुनिक एक्सरे ट्यूब में यह मेटल या सिरेमिक का भी बना होता हैं | एक्सरे ट्यूब में निर्वात क्यों रखा जाता हैं ?
एक्सरे ट्यूब में कैथोड से उच्च गति से उत्सर्जित इलेक्ट्रान उसके सामने स्थित एनोड से टकराते हैं, इस टक्कर के फलस्वरूप 99% इलेक्ट्रॉन्स की गतिज उर्जा ऊष्मा में परिवर्तित हो जाती हैं  तथा केवल 1% से भी कम इलेक्ट्रान की गतिज उर्जा आवश्यक एक्सरे में परिवर्तित होती हैं | अगर ट्यूब में निर्वात न होकर हवा भरी हो तो कैथोड से उत्सर्जित इलेक्ट्रान सीधे एनोड से न टकराकर रास्ते में हवा में उपस्थित गैसों के अणुओ  (O2, N2 आदि ) से टकरायेंगे, जिससे इन गैस के अणु का आयनन से इनके ऑर्बिटल इलेक्ट्रान का उत्सर्जन होगा | इन उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन्स को सेकेंडरी इलेक्ट्रान कहते हैं |इन सेकेंडरी इलेक्ट्रॉन्स की कैथोड द्वारा उत्सर्जित प्राइमरी इलेक्ट्रान से उर्जा कम होती हैं, जिससे ये कम वेग से एनोड से टकराते हैं | इनकी एनोड पर टक्कर से कम उर्जा की एक्सरे निकलती हैं तथा इनके उत्सर्जन का नियन्त्रण भी संभव नहीं हैं जिससे एक्सरे ट्यूब करंट में बहुत अधिक परिवर्तन आ जाता हैं | प्रारम्भिक एक्सरे ट्यूब क्रुक्स ट्यूब का रूपांतरण थी इसमें नियंत्रित मात्रा में गैस भरी होती थी | आधुनिक एक्सरे ट्यूब कूलिज ट्यूब का रूपांतरण होती हैं जो पूर्णत निर्वातित होती हैं |
     अतः इन सेकेंडरी इलेक्ट्रान के उत्सर्जन को रोकने के लिए एक्सरे ट्यूब में निर्वात रखा जाता हैं | अगर इन ट्यूब में गैस भर जाये तो इससे एक्सरे का उत्पादन गिर जाता हैं तथा एक्सरे ट्यूब फ़ैल हो जाती हैं | जैसे जैसे एक्सरे ट्यूब पुरानी होती जाती हैं, ट्यूब के इलेक्ट्रोड में उपस्थित टंगस्टन धातु वाष्पित होकर ट्यूब आवरण के भीतरी सतह पर एक पतली परत के रूप में चिपक जाती हैं | जिससे ट्यूब का रंग परिवर्तित होकर  सनबर्न ब्रोंज रंग हो जाता हैं | इस टंगस्टन परत व इलेक्ट्रान बीम के मध्य एक पोटेंशियल उत्पन्न हो जाता हैं जिससे कैथोड से उत्सजित इलेक्ट्रान इस की और आकर्षित होती हैं जिससे इलेक्ट्रिक आर्क प्रक्रिया के कारण एक्सरे तुबे पंक्चर हो जाती हैं | इस समस्या के समाधान के लिए आधुनिक एक्सरे ट्यूब के बाह्य आवरण का कुछ भाग या सम्पूर्ण बाह्य आवरण ही धातु का बनाया जाता हैं | एक्स  रे ट्यूब के कार्य-
      (i) यह एनोड व कैथोड को इंसुलेशन (Insulation ) व सपोर्ट (Support) प्रदान करता हैं |
      (ii) यह एक्सरे ट्यूब में निर्वात (Vacuum) बनाये रखता हैं |
2. कैथोड (Cathode )- कैथोड  टंगस्टन धातु का बना तार होता हैं जिसका व्यास लगभग 0.2 mm होता हैं | यह 0.2 cm की  कुंडली के रूप में लपेटा हुआ होता हैं जिसे फिलामेंट कहते हैं | इसे एक फोक्सिंग कप (Focusing Cup ) घेरे रहता हैं | फिलामेंट में 10 V का विभवान्तर व 3-6 Amp की धारा प्रवाहित की जाती हैं, जिससे इलेक्ट्रान के प्रवाह में प्रतिरोध के कारण फिलामेंट गर्म होता हैं तथा तापीय उत्सर्जन (Thermionic Emission ) प्रभाव के कारण इलेक्ट्रान का उत्सर्जन होता हैं | किसी धातु को गर्म करने पर इसके ऑर्बिटल इलेक्ट्रान का इसके स्थान को छोड़ कर इसकी सतह के बहार आ जाना तापायनिक उत्सर्जन कहलाता हैं | इन उत्सर्जित  इलेक्ट्रान की संख्या  का  ताप पर निर्भर करती हैं |  फिलामेंट की आयु व क्षमता बढ़ाने के लिए थोडा सा थोरियम मिलाया जाता हैं|
          सामान्यतः एक्सरे ट्यूब में दो फिलामेंट होते हैं जो फोक्सिंग कप में side by side या क्षैतिज लगे होते हैं  |  ये स्माल फोकल स्पॉट व लार्ज फोकल स्पॉट फिलामेंट कहलाते हैं |
    (a) स्माल फोकल स्पॉट- यह उन रेडियोग्राफिक प्रोजेक्शन में कम आता हैं जिनमे बहुत ज्यादा डिटेल  की आवश्यकता हो जैसे - Chest Xray, Abdomen Xray |
    (b) लार्ज फोकल स्पॉट - जिन बॉडी एनाटोमी रेडियोग्राफ में ज्यादा डिटेल की आवश्यकता नहीं होती वहा किये जाते हैं जैसे- Upper and Lower Extrimities |
कुछ आधुनिक एंजियोग्राफी मशीन में तीन फिलामेंट भी होते हैं |
कैथोड को हाई वोल्टेज के ऋणात्मक भाग से जोड़ा जाता हैं |